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दर्शन : 'क्या' से अधिक 'क्यों'

आज के समय मे शिक्षा का महत्व केवल तथ्यात्मक नही अवधारणात्मक होना चाहिए। यदि हम चीजो को वैज्ञानिक रूप से (S cientifically) समझना चाहे तो सामान्यतः हमने जाना होगा कि हमे "कब" और "कहाँ" नही बल्कि "क्या" "क्यों" और "कैसे" पर ध्यान देना चाहिए, जो काफ़ी हद तक सही भी है परन्तु मेरी राय में हम इन तथ्यों एवं अवधारणाओ के विश्लेषण द्वारा स्वयं के लिए, समाज के लिए, देश अथवा विश्व के लिए कितनी उपयोगिता (U tility) सिद्ध कर पाने में सफल होते हैं।दर्शनशास्त्र में इसे Applied Philosophy कहते हैं।           उदाहरण के लिए इतिहास विषय मे हमे यह समझने की आवश्यकता नही है कि कौनसी घटना किस विशिष्ट स्थान तथा समयकाल में हुई? बल्कि यह समझने की आवश्यकता है कि किसी घटना के पीछे कौनसे कारक जिम्मेदार थे? उस विशिष्ट घटना से अन्य समकालीन परिस्थितियाँ किस प्रकार सम्बंधित हैं? और बाद के परिदृश्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ा?           न केवल इतना ही, बल्कि वर्तमान परिपेक्ष्य में हम घटनाओ का विश्लेषणात्मक अध्ययन करके समाज की क्या उपयोगि...

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नमस्कार, मेरे blogs दर्शन विषय से सम्बंधित मेरे व्यक्तिगत विचारो को साझा करने का प्रयास हैं। मेरे विचारों में दर्शनशास्त्र एवं नीतिशास्त्र विषय से सम्बन्धित लेख होंगे। इसके अलावा जीवन, समाज, मनोविज्ञान तथा व्यवहारवाद जैसे गूढ़ विषयो के साथ-साथ राजनीति, इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र, तथा विज्ञान (भौतिकी, रसायन व जीव विज्ञान) जैसे व्यवहारिक जीवन से सम्बन्धित मूर्त एवं तकनीकी विषयो की सतही जानकारी के साथ इनके अन्य पक्षो, विशेषकर दार्शनिक पहलू पर विश्लेषणात्मक व्याख्या एवं तथ्यात्मक आलोचना के साथ मेरे व्यक्तिगत मत तथा सुझाव होंगे।  आशा हैं मेरा यह प्रयास इस विषय मे रुचि लेने वाले व्यक्तियों के लिए हितकर सिद्ध होगा। आपकी प्रतिपुष्टियो का स्वागत हैं। धन्यवाद